Humayun ka maqbara
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हुमायूं का मकबरा पर निबंध – भारत का गौरव कहा जाने वाला हुमायूं का मकबरा की जानकारी – Humayun ka maqbara

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हुमायूं का मकबरा पर निबंध – भारत का गौरव कहा जाने वाला हुमायूं का मकबरा की जानकारी – Humayun ka maqbara

मुगल काल में ऐसे दर्जनों इमारतों तथा मक़बरों का निर्माण हुआ जो कि अपनी नायाब खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इसके अलावा मुगल काल में निर्मित कई इमारतें आज विश्व के प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। ताजमहल, लालकिला, कुतुबमीनार इत्यादि इसका जिता जागता उदाहरण है।

ताज महल, लाल किला, क़ुतुब मीनार इत्यादि को आमतौर से सभी लोग जानते हैं लेकिन हुमायूं का मकबरा (humayun ka maqbara) भी मुगल काल में निर्मित एक शानदार संरचना है। तो चलिए आपको इस आर्टिकल में हुमायूं का मकबरा पर निबंध बताने के साथ-साथ हुमायूं का मकबरा की जानकारी तथा हुमायूं का मकबरा hindi में बताते हैं।

● हुमायूं का मकबरा कहां स्थित है – Humayun ka maqbara kahan sthit hai

हुमायूं के मकबरे की जब बात की जाती है तो सबसे पहले सवाल आता है कि हुमायूं का मकबरा कहां स्थित है। या हुमायूं का मकबरा कहां है। तो आपको बता दें कि हुमायूं का मकबरा दिल्ली में निजामुद्दीन के करीब में स्थित है। यह मकबरा 27 हेक्टेयर के विशाल परिसर में फैला हुआ है। इस मकबरे के चारों और लगभग 13 एकड़ में विशाल बाग़ भी लगे हुए हैं।

● हुमायूं का मकबरा किसने बनवाया – Humayun ka Maqbara kisne banwaya

ये जानने के बाद कि हुमायूं का मकबरा कहाँ है। अगला अहम सवाल आता है कि हुमायूं का मकबरा किसने बनवाया या दिल्ली में हुमायूं का मकबरा किसने बनवाया था। तो बता दें कि हुमायूं के मकबरे का निर्माण हुमायूं की मृत्यु के बाद उनकी पहली पत्नी बेगा बेगम (Bega Begam) के आदेश पर शुरू हुआ था।  बेगम बेगम को हाजी बेगम (Haji Begam) के नाम से भी जाना जाता है।

27 जनवरी 1556 को हिमायू की मृत्यु हुई थी। इसके 2 साल बाद यानी 1958 में मायू की पत्नी ने इस मकबरे के निर्माण का फैसला किया। हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने में कई वर्षों का समय लग गया था।

बात करें कि हुमायूं का मकबरा कब बना था तो बता दें कि यमुना नदी के किनारे पर हुमायूं के मकबरे का निर्माण 1565 में शुरू हुआ। तथा दिन रात की लगातार मेहनत के बाद 1572 में यह मकबरा पूरी तरीके से बनकर तैयार हो गया। यह पूरा मकबरा एक 7 मीटर ऊंचे चबूतरे पर बनाया गया है। उस समय इस मकबरे को बनाने में लगभग 15 लाख रुपए खर्च हुए थे। यह पूरा खर्चा हुमायूं की पहली पत्नी बेगा बेगम ने ही उठाया था।

● हुमायूं का मकबरा किसने बनाया – Who Design Humayun ka makbra

हुमायूं के मकबरे के निर्माण के लिए विशेष तौर से कारीगर दूसरे देशों से मंगवाए गए थे। हुमायूं के मकबरे का डिजाइन उज़्बेकिस्तान के आर्किटेक्ट मीराक मिर्जा ग्यास तथा इनके बेटे सईद मोहम्मद ने तैयार किया था। हुमायूं का ये मकबरा मुगल वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। यह पहला  मकबरा है जिसमें मुग़ल वास्तुकला के साथ साथ फारसी स्थापत्य कला की भी झलकियां देखने को मिलती हैं।

● हुमायूं का मकबरा के बारे में – about हुमायूं का मकबरा

इस मकबरे के बिल्कुल बीचो बीच मुख्य हिस्से में हुमायूं की कब्र है। हुमायूं के मकबरे का निर्माण हुमायूं की मृत्यु के कई साल बाद शुरू हुआ था। इसलिए हुमायूं को बाद में यहां दफन किया गया था। सबसे पहले हिमायू को पुराना किला में दफन किया गया था। यहां से हुमायूं को पंजाब के सिरहिंद में दफन कर दिया गया। इसके बाद आखिरकार इन्हें हुमायूं के मक़बरे में दफन कर दिया गया।

इस मकबरे में हुमायूं की कब्र के अलावा लगभग मुगल सल्तनत से संबंधित डेढ़ सौ अन्य लोगों की भी कब्रें हैं जिसमें हुमायूं की पत्नियों की कब्रें तथा शाहजहां के बेटे दारा शिकोह की भी कब्रें शामिल है।

हुमायूं का मकबरा दुनिया का पहला ऐसा मकबरा है जिसका निर्माण पूरी तरीके से लाल पत्थर से किया गया है।  लाल पत्थर के अलावा इस मकबरे में खूबसूरती को बढ़ाने के लिए तथा नक्काशी के लिए सफेद मार्बल का भी उपयोग किया गया है।

यह दो मंजिला मकबरा है जिसके निचले तल पर हिमायू समेत अन्य लोगों की कब्रें है। इस मकबरे के मुख्य इमारत में हुमायूं समेत उनकी पत्नियों तथा शाहजहां के बेटों की कब्रें हैं। जबकि बाकी लोगों की कब्रें मकबरे के बाहरी अहाते में स्थित है।

कब्रों के अलावा इस मकबरे के बाकी हिस्सों में बड़े-बड़े कमरे तथा ऊंची ऊंची दरवाजे हैं। इस मकबरे के कई दरवाजों की ऊंचाई 48 फीट तक है। इसके अलावा मकबरे तक आने के लिए इसके चारों ओर विशाल दरवाजों तथा सीढ़ियों का भी निर्माण किया गया है।

हुमायूं के मकबरे में लाल पत्थर तथा मार्बल पर जो नक्काशी और कारीगरी की गई है, वह हर किसी का मन मोह लेता है। इस मकबरे में लगे पत्थरों पर नक्काशी करने के लिए कारीगर भी विशेष तौर से बुलाए गए थे।

हुमायूं के मकबरे की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े झरोकों तथा छजझो का भी निर्माण किया गया है। इसके अलावा मकबरे के ठीक सामने एक बड़े से झरोखे का भी निर्माण किया गया है। झरोखे में वर्तमान समय में कई प्रकार की पक्षियों का बसेरा है।

मकबरे की खूबसूरती में इसके ऊपर बने विशाल गुंबद चार चांद लगाते हैं। इन गुंबदों का निर्माण इस्लामिक शैली के आधार पर किया गया है। इस पूरे मकबरे में अनगिनत छोटे-बड़े गुंबद मौजूद है जो कि इस मकबरे की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं।

● हुमायूं का मकबरा दिल्ली में – Humayun ka Maqbara Delhi

यह पूरा मकबरा एक चौकोर मैदान के बीचो बीच स्थित है। मकबरा 27 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। जबकि इसके चारों और खूबसूरत बाग़ लगे हुए हैं। हुमायूं के मकबरे में लगे बाग़ को चारबाग (Charbaag) के नाम से जाना जाता है। वहां की हरियाली इस जगह को और खास बनाती है। जब इस महल का निर्माण किया गया था तब इसके चारों ओर काफी खूबसूरत बागबानी की गई थी। यहां इस बाग में भारत के अलावा अन्य देशों से भी खूबसूरत पेड़ पौधे मंगवाए गए थे।

इस कारण जितनी चर्चा हिमायू के मकबरे की थी, उतनी ही चर्चा इतिहास में चारबाग की भी देखने को मिलती है। हालांकि जब तत्कालीन मुगल बादशाह ने अपनी राजधानी को दिल्ली से हटाकर आगरा ले जाने का फैसला किया तो इस फैसले का असर हुमायूं के मकबरे पर भी पड़ा क्योंकि इस बागवानी की रखरखाव तथा देखरेख में काफी खर्चा होता था तथा इसे नियमित रूप से विशेष देखभाल की जरूरत थी। लेकिन राजधानी के हस्तांतरित होने के कारण उचित देखभाल नहीं हो पाया। इस कारण समय के साथ हुमायूं के मकबरे के बाग़ की रौनक कम होती चली गई। हालांकि बाद में इस पर जरूर ध्यान दिया गया है। इस कारण जब आप आ जाएंगे तो आप को इस मकबरे के चारों ओर काफी खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा।

हिमायू का मकबरा कितना शानदार है इसका अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं की इसके बाद भारत में जितने भी मकबरे का निर्माण बाकी के शासकों द्वारा करवाया गया वह सभी इसी मकबरे से प्रेरित है। उत्तर प्रदेश के सिकंदरा में स्थित अकबर का मकबरा,  तुगलकाबाद में गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा, लोदी गार्डन और ताज महल में सिकंदर लोदी का मकबरा इत्यादि हुमायूं के मकबरे से ही प्रेरित हैं।

● Humayun ka Maqbara UNESCO

1993 में यूनेस्को ने हुमायूं के मकबरे को World Heritage Site में शामिल कर लिया था। यूनेस्को वर्ल्ड हेरीटेज साइट घोषित होने के बाद इस मकबरे की चर्चा और भी अधिक होने लगी तथा इसकी ख्याति विश्व के कोने-कोने तक पहुंच गई। यही कारण है कि आज भी इस मकबरे की खूबसूरती को देखने के लिए दुनिया भर के देशों से पर्यटक आते रहते हैं।  तथा  वर्तमान समय में हुमायूं के मकबरे की गिनती भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में होती है।

उम्मीद है कि आपको जवाब मिल गया है कि हुमायूं का मकबरा कहाँ स्थित है। इसके अलावा आपको ये भी पता लग गया है कि हुमायूं का मकबरा किसने बनवाया था तथा हुमायूं का मकबरा नई दिल्ली दिल्ली में कहां पर है।

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