कम उम्र में हार्ट ब्लॉकेज की समस्या से कैसे बचें!

मनुष्य का जीवन व्याधि और उपाधि इन दो दिशाओं में चलता है, व्याधि अर्थात शारीरिक और उपाधि मतलब…
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मनुष्य का जीवन व्याधि और उपाधि इन दो दिशाओं में चलता है, व्याधि अर्थात शारीरिक और उपाधि मतलब मानसिक। आजकल जीवन में व्यस्तता अधिक बढ़ती जा रही है जिससे कि हम तकनीकी रूप से तो शक्तिशाली हो ही रहे हैं लेकिन शारीरिक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं।

फलस्वरूप युवा अवस्था से ही शरीर को कई बीमारियां घेर लेती हैं, जिसमें हार्ट ब्लॉकेज जैसी समस्या उभर के आ रही है। यह बीमारी सिर्फ बुज़ुर्गों में ही नहीं बल्कि कॉलेज में पढ़ रहे विद्यार्थियों से लेकर ऑफिस जाने वाले युवाओ में भी देखी जा रही है।

हार्ट ब्लॉकेज दिल की धड़कन से संबंधित बीमारी है, जिसमें मनुष्य की धड़कन सुचारू रूप से कार्य नहीं कर पाती। जिससे हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी भी हो जाती है। कुछ लोगों को यह समस्या जन्म से ही होती है जिसे मेडिकल भाषा में कॉन्जेनाइटल हार्ट ब्लॉकेज (Congenital Heart Blockage) कहते हैं।

वहीं खराब दिनचर्या, गलत जीवन शैली से और गलत खानपान से जो समस्या बाद में उत्पन्न होती है उसे एक्वायर्ड हार्ट ब्लॉकेज (Acquired Heart Blockage) कहते हैं।

हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण:

हार्ट ब्लॉकेज अलग-अलग स्टेज पर होता है, फर्स्ट स्टेज में कोई ख़ास लक्षण नहीं होते। सेकेंड स्टेज में दिल की धड़कन सामान्य से थोड़ी कम हो जाती है और थर्ड स्टेज में दिल रुक-रुक कर धड़कना शुरू कर देता है।

सेकेंड या थर्ड स्टेज पर हार्ट अटैक भी आ सकता है इसलिए इसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।

हार्ट ब्लॉकेज के अन्य लक्षण निम्न हैं –

  • बार-बार चक्कर आना
  • बार-बार सिरदर्द होना
  • छाती में दर्द होना
  • सांस फूलना
  • अधिक थकान होना
  • बेहोश होना
  • गर्दन, ऊपरी पेट, जबड़े, गले या पीठ में दर्द होना
  • अपने पैरों या हाथों में दर्द होना या स्तब्ध हो जाना
  • कमजोरी या ठंड लगना।

हार्ट ब्लॉकेज के कारण: (Causes of Heart Blockage)

हार्ट ब्लॉकेज प्लॉक के कारण होती है जो कि फैट, फाइबर टिश्यू, कोलेस्ट्रॉल और श्वेत रक्त कणिकाओं का मिश्रण होता है। जो धीरे-धीरे नसों पर चिपक जाता हैं जिससे कि ब्लड फ्लो अच्छी तरह से नहीं हो पता है।

प्लॉक अगर ठोस है या गाढ़ा है तो उसे स्टेबल (stable) कहा जाता है और अगर वो मुलायम है तो उसे अनस्टेबल प्लॉक (unstable plaque) कहते है।

  • स्टेबलप्लाक धीरे-धीरे बढ़ता है जिससे रक्त प्रवाह को नई आर्टरीज (Arteries) का रास्ता ढूंढने का मौका मिल जाता है, जिसे कोलेटरल वेसेल (Collateral Vessels) कहते हैं। ये वेसेल दिल की मांसपेशियों तक आवश्यक ऑक्सीजन और रक्त पहुंचाती हैं।
  • अनस्टेबल प्लॉक या अस्थायीप्लॉक के टूटने पर एक गंभीर थक्का बन जाता है जिससे कोलेटरल को विकसित होने का पूरा समय नहीं मिल पता। इसमें  मांसपेशियां (muscle) गंभीर रूप से डैमेज हो जाती हैं और कई बार सडन कार्डिएक डेथ (sudden cardiac death) भी हो सकती है।

हार्ट ब्लॉकेज का इलाज: Treatment of Heart Blockage

हार्ट ब्लॉकेज सेकंड स्टेज या थर्ड स्टेज का इलाज पेसमेकर की सहायता से किया जाता है, जिससे हार्ट बीट्स को इलेक्ट्रिकल पल्स से बढ़ाया जाता है। हार्ट ब्लॉकेज किसी भी स्टेज पर स्वास्थ के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं, इसलिए उपचार में लापरवाही न बरतें।

मेडिकल साइंस में हार्ट ब्लॉकेज का इलाज संभव है। वही आयुर्वेद में भी इसका इलाज आसानी से उपलब्ध है और इससे बचने के लिए आप घरेलू उपचार भी अपना सकते हैं।

मेडिकल इलाज:

आमतौर पर एंजियोग्राफी की मदद से ब्लॉकेज का पता लगाया जाता है। 20-45% तक का ब्लॉकेज दवाओं से ठीक किया जाता है लेकिन इससे अधिक प्रतिशत होने पर एंजियोप्लास्टी द्वारा इलाज किया जा सकता है।

80 से 90% ब्लॉकेज ब्लॉकेज होने पर ऑपरेशन की सहायता से पेसमेकर, जो कि एक बैटरी से संचालित यंत्र है, हार्ट के पास फिक्स कर दिया जाता है। इससे निकलने वाली तरंगें दिल की धड़कन को नियमित बनाए रखती हैं। इसके अलावा गंभीर समस्या में बायपास सर्जरी, एंजियोग्राम, आर्टरी ग्राफ्ट और वेन ग्राफ्ट जैसी तकनीकों का भी प्रयोग किया जाता है।

हार्ट ब्लॉकेज से बचाव के घरेलू उपाय:

  1. एक कप दूध में 3-4 कलीलहसुन डाल कर उबालें और इसका सेवन रोज़ करें।
  2. एक गिलास दूध में हल्दी डाल कर उबालें और गुनगुना होने पर शहद डाल कर इसका सेवन करें।
  3. खाने में अलसी के बीजों का उपयोग ज़रूर करें।
  4. अदरक कोपानी में उबाल कर शहद मिलाकर रोज 2-3 कप पिएं।
  5. खाने में सामान्य चावल की जगह लाल यीस्ट चावल का प्रयोग करें।
  6. एक गिलास गुनगुने पानी में नीबू का रस, शहद और काली मिर्च डाल कर पीएं।
  7. मैथी दाने को रातभर पानी में भिगाकर, सुबह मैथी चबाकर खायें और बचा हुआ पानी पी जाएं।

“Precaution is better than cure” अर्थात एहतियात इलाज से बेहतर है इसलिए सुबह जल्दी उठें, मॉर्निंग वॉक पर जाएं, योग या एक्सरसाइज करें। इससे शरीर के मेटाबॉलिज्म का स्तर नियंत्रित रहता है और हृदय की धमनियों में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल का जमाव नहीं होता। सादा, संतुलित खाना खाएं।

ज्यादा घी-तेल और मसालों के सेवन से बचें। यह समस्या आनुवंशिक कारणों से भी होती है। अगर परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा है तो एहतियात के तौर पर हर साल नियमित हार्ट चेकअप ज़रूर कराएं।

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